श्री बगलामुखी चालीसा
दोहा:
नमनुं श्री बगला महा, संकट हरनि होय।
करहुं कृपा सब कामना, पूर्ण करहुं सब कोय॥
चौपाई:
जय बगला जय महा माया। जयति जयति जय साधु सहाय।।
पीतांबर वसन विराजे। करुणा रूप करहुं अनुराजे।।
त्रैलोक्य में तव यश छाया। दुष्ट दलन हित नाम सुभाया।।
शत्रु नाश करहुं महारानी। करहुं कृपा दीन पर दानी।।
जो जन नाम जपे मन लाई। सब विधि होय काम सुखदाई।।
पीत वार्ण तनु पीत वसन धारी। मंद मंद मुस्कान सुखकारी।।
त्रिशूल गदा कर में धारी। शत्रु नाशनी कृपा तुम्हारी।।
कमलासन ऊपर तव आसन। सुमिरत होत सकल शुभ राशन।।
ब्रह्मास्त्र रूप जगत में जानी। सकल सृष्टि की हो शुभ बानी।।
ब्रह्म वेद अदि देव मनावे। जो कोई ध्यान लगावे।।
पीड़ा हरहु संकट सब टारो। भक्तन के तुम काज संवारो।।
रिपु संहार करहुं महारानी। जगत पूज्य देवी भवानी।।
शरण गहि कीजै उपकारी। संकट मोचन नाम तुम्हारी।।
सुख समृद्धि घर आवे। जो जन ध्यान लगावे।।
बगला देवी तव नाम उचारे। सकल शत्रु दल दूर निवारे।।
भूत प्रेत बाधा सब नाशे। धन वैभव सुख संपति वासे।।
सिद्धि दायिनी महा बलवानी। कष्ट निवारिणि जय जग वंदनी।।
जो मनुष्य पढ़े चालीसा। होय सिद्धि सुख रूप महीसा।।
दोहा:
बगला नाम जो जपे, संकट सब मिटि जाय।
सिद्धि बुद्धि घर आवे, सुख समृद्धि बढ़ाय॥
यह चालीसा माता बगलामुखी के भक्तों द्वारा शत्रु नाश, सफलता और सभी संकटों को दूर करने के लिए पढ़ी जाती है।
Shri Baglamukhi Chalisa
Doha:
Namanu Shri Bagla Maha, Sankat Harni Hoy।
Karahu Kripa Sab Kamna, Poorn Karahu Sab Koy॥
Chaupai:
Jai Bagla Jai Maha Maya। Jayati Jayati Jai Sadhu Sahay॥
Peetambar Vasan Viraje। Karuna Roop Karahu Anuraje॥
Trailokya Mein Tav Yash Chhaya। Dusht Dalan Hit Naam Subhaya॥
Shatru Naash Karahu Maharani। Karahu Kripa Deen Par Daani॥
Jo Jan Naam Jape Man Laai। Sab Vidhi Hoy Kaam Sukhdaai॥
Peet Varn Tanu Peet Vasan Dhaari। Mand Mand Muskan Sukhkaari॥
Trishul Gada Kar Mein Dhaari। Shatru Naashni Kripa Tumhari॥
Kamalasan Upar Tav Aasan। Sumirat Hot Sakal Shubh Raashan॥
Brahmastra Roop Jagat Mein Jaani। Sakal Srishti Ki Ho Shubh Baani॥
Brahm Ved Aadi Dev Manave। Jo Koi Dhyan Lagave॥
Peeda Harahu Sankat Sab Taaro। Bhaktan Ke Tum Kaaj Sanwaro॥
Ripu Sanhaar Karahu Maharani। Jagat Pujya Devi Bhavani॥
Sharan Gahi Keejai Upkaari। Sankat Mochan Naam Tumhari॥
Sukh Samriddhi Ghar Aave। Jo Jan Dhyan Lagave॥
Bagla Devi Tav Naam Uchaare। Sakal Shatru Dal Door Nivaare॥
Bhoot Pret Baadha Sab Naashe। Dhan Vaibhav Sukh Sampatti Vaase॥
Siddhi Dayini Maha Balvaani। Kasht Nivaarini Jai Jag Vandani॥
Jo Manushya Padhe Chalisa। Hoy Siddhi Sukh Roop Mahisa॥
Doha:
Bagla Naam Jo Jape, Sankat Sab Miti Jaay।
Siddhi Buddhi Ghar Aave, Sukh Samriddhi Badhay॥
Mata Baglamukhi ki ye Chalisa shatru naash, safalta aur sabhi sankaton ko door karne ke liye padhi jaati hai।
माँ बगलामुखी का परिचय (माँ बगलामुखी का परिचय, दस महाविद्या)
माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में से आठवीं देवी हैं। इन्हें "श्री बगलामुखी" के नाम से जाना जाता है और ये शक्ति का एक प्रबल स्वरूप हैं। "बगलामुखी" नाम दो शब्दों से मिलकर बना है - "बगला" (जो एक पक्षी का प्रतीक है) और "मुखी" (मुख या शक्ति)। इसका अर्थ है कि ये देवी अपने भक्तों के शत्रुओं को अपने प्रभाव में ले लेती हैं। माँ बगलामुखी को शत्रु नाशक और संकट मोचन के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि जब कोई व्यक्ति शत्रुओं, मुकदमों, या नकारात्मक शक्तियों से परेशान होता है, तो माँ बगलामुखी की कृपा से वह सभी बाधाओं से मुक्त हो जाता है। "माँ बगलामुखी का परिचय" जानने वाले भक्त उनकी महिमा और शक्ति के बारे में और अधिक समझना चाहते हैं। वे पीतांबरा माई के नाम से भी प्रसिद्ध हैं, क्योंकि उनका प्रिय रंग पीला है।
माँ बगलामुखी का स्वरूप (माँ बगलामुखी का स्वरूप, पीतांबरा माई)
माँ बगलामुखी का स्वरूप अत्यंत प्रभावशाली और तेजस्वी है। "माँ बगलामुखी का स्वरूप" बेहद अनोखा है। वे पीले वस्त्र धारण करती हैं और उनके शरीर पर पीला रंग चमकता है, इसलिए इन्हें "पीतांबरा माई" कहा जाता है। उनके तीन नेत्र हैं, जो त्रिकालदर्शी होने का प्रतीक हैं। माँ के दाएं हाथ में एक गदा है, जिससे वे शत्रुओं का संहार करती हैं, और बाएं हाथ से वे शत्रु की जीभ पकड़कर उसे स्तंभित कर देती हैं। वे स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान होती हैं, जो उनकी राजसी शक्ति को दर्शाता है। उनका तेज सूर्य के समान है और वे अपने भक्तों को साहस और आत्मविश्वास प्रदान करती हैं। माँ का यह स्वरूप शत्रुओं को परास्त करने और भक्तों की रक्षा करने का संकेत देता है।
माँ बगलामुखी की कथा ( बगलामुखी की कथा, शत्रु नाशक देवी)
"माँ बगलामुखी की कथा" बहुत रोचक और प्रेरणादायक है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब सृष्टि पर एक भयंकर तूफान आया और सब कुछ नष्ट होने लगा, तब भगवान विष्णु ने माँ बगलामुखी की आराधना की। माँ ने अपने प्रभाव से तूफान को शांत कर दिया और सृष्टि की रक्षा की। एक अन्य कथा में कहा जाता है कि एक बार एक दुष्ट असुर ने देवताओं पर आक्रमण किया। माँ बगलामुखी ने उस असुर की जीभ पकड़कर उसे स्थिर कर दिया और उसका अंत कर दिया। इसीलिए उन्हें "शत्रु नाशक देवी" कहा जाता है। ये कथाएं बताती हैं कि माँ बगलामुखी की शक्ति असीम है और वे अपने भक्तों को हर संकट से बचाती हैं। "माँ बगलामुखी की कथा" खोजने वाले भक्त उनकी दिव्य शक्ति से प्रेरित होते हैं।
माँ बगलामुखी की पूजा विधि ( बगलामुखी पूजा विधि, हल्दी माला)
"माँ बगलामुखी पूजा विधि" बहुत प्रभावशाली और विशिष्ट है। पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले वस्त्र पहनें। पूजा स्थान पर माँ की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। उन्हें पीले फूल, हल्दी, और चंदन अर्पित करें। "हल्दी माला" से मंत्र जाप करना माँ को प्रसन्न करने का विशेष तरीका है। माँ को पीले रंग की मिठाई, जैसे लड्डू या हलवा, का भोग लगाएं। घी का दीपक जलाएं और उनकी चालीसा का पाठ करें। पूजा के दौरान मन को शांत रखें और शत्रुओं से मुक्ति की प्रार्थना करें। मान्यता है कि माँ बगलामुखी की पूजा से मुकदमों में विजय, शत्रुओं पर नियंत्रण, और मानसिक शांति मिलती है। "माँ बगलामुखी पूजा विधि" जानने वाले भक्त इसे सही तरीके से करना चाहते हैं।
माँ बगलामुखी के मंत्र (बगलामुखी मंत्र, बीज मंत्र)
माँ बगलामुखी के कुछ शक्तिशाली मंत्र हैं, जो "माँ बगलामुखी मंत्र" सर्च करने वालों के लिए उपयोगी हैं:
- बीज मंत्र: "ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा" - यह मंत्र शत्रुओं को स्तंभित करने और बुद्धि को भ्रमित करने के लिए जपा जाता है।
- स्तुति मंत्र: "ॐ बगलामुख्यै च विद्महे स्तम्भिन्यै च धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात्" - यह मंत्र उनकी शक्ति का आह्वान करता है।
- प्रार्थना मंत्र: "ह्लीं बगले सर्व शत्रुणां स्तम्भिनी रक्ष रक्ष स्वाहा" - इससे रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
"बीज मंत्र" का जाप कम से कम 108 बार हल्दी की माला से करें। यह मंत्र भक्तों को शक्ति और शत्रुओं पर विजय दिलाता है।
माँ बगलामुखी का महत्व (बगलामुखी का महत्व, तांत्रिक साधना)
"माँ बगलामुखी का महत्व" उनके शत्रु नाशक स्वरूप के कारण है। वे न केवल शारीरिक शत्रुओं, बल्कि मानसिक बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा से भी रक्षा करती हैं। "तांत्रिक साधना" में माँ बगलामुखी की पूजा बहुत प्रभावशाली मानी जाती है। उनकी साधना से साधक को वाक् सिद्धि, शत्रुओं पर नियंत्रण, और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। ज्योतिष में मंगल ग्रह से संबंधित दोषों को दूर करने के लिए भी उनकी पूजा की जाती है। जो लोग मुकदमों, विवादों, या षड्यंत्रों से परेशान हैं, उनके लिए माँ बगलामुखी की कृपा वरदान स्वरूप है। "माँ बगलामुखी का महत्व" समझने वाले भक्त उनकी शक्ति से जीवन को बेहतर बनाना चाहते हैं।
माँ बगलामुखी से जुड़े प्रतीक और उनके अर्थ
- गदा: शत्रुओं के विनाश का प्रतीक।
- जीभ पकड़ना: शत्रु की वाणी और बुद्धि पर नियंत्रण।
- पीला रंग: शक्ति, ऊर्जा, और सकारात्मकता का संकेत।
- स्वर्ण सिंहासन: राजसी शक्ति और सम्मान का प्रतीक।
- दोहा: "जय जय श्री बगला माता, शत्रु नाशिनी जय। पीत वसन तन शोभित, करहु कृपा नित भय।"
- अर्थ: माँ बगलामुखी की जय हो, जो शत्रुओं का नाश करती हैं। पीले वस्त्रों से सुशोभित माँ हमेशा कृपा करें और भय दूर करें।
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