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गणेश जी की आरती | Ganesh Aarti Lyrics in Hindi (जय गणेश देवा)

गणेश जी की आरती (जय गणेश जय गणेश देवा) हिंदी में पढ़ें। यहाँ पूरी आरती, अर्थ, लाभ और पूजा विधि दी गई है। PDF डाउनलोड और सही उच्चारण के साथ।

गणेश जी की आरती (Ganesh Ji Ki Aarti)

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

एकदंत दयावंत चार भुजाधारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

सूर्य श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥


Ganesh Ji Ki Aarti in Hinglish

Jai Ganesh Jai Ganesh Jai Ganesh Deva,
Mata Jaaki Parvati Pita Mahadeva॥

Ekadanta Dayavanta Chaar Bhujadhari,
Mathe Sindoor Sohe, Moose Ki Sawaari॥

Jai Ganesh Jai Ganesh Jai Ganesh Deva,
Mata Jaaki Parvati Pita Mahadeva॥

Andhan Ko Aankh Det, Kodhin Ko Kaya,
Baanjan Ko Putra Det, Nirdhan Ko Maya॥

Jai Ganesh Jai Ganesh Jai Ganesh Deva,
Mata Jaaki Parvati Pita Mahadeva॥

Surya Shyam Sharan Aaye, Safal Keeje Seva,
Mata Jaaki Parvati Pita Mahadeva॥

Jai Ganesh Jai Ganesh Jai Ganesh Deva,
Mata Jaaki Parvati Pita Mahadeva॥

गणेश जी की आरती का अर्थ

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

👉 हे गणेश भगवान! आपकी जय हो। आप माता पार्वती और भगवान महादेव के पुत्र हैं।

एकदंत दयावंत चार भुजाधारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥

👉 आप एकदंत (एक दाँत वाले), दयालु और चार भुजाओं से युक्त हैं। आपके मस्तक पर सिंदूर शोभा पा रहा है और आपकी सवारी मूषक है।

अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥

👉 आप अंधों को आँखें देते हैं, कोढ़ से पीड़ित को नया शरीर देते हैं। बाँझ स्त्री को संतान का सुख और निर्धन को धन-संपत्ति प्रदान करते हैं।

सूर्य श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

👉 जो भी भक्त आपकी शरण में आता है और सेवा करता है, उसका जीवन सफल हो जाता है। आप सबका कल्याण करते हैं।

गणेश जी की आरती का महत्व और लाभ

गणेश आरती का महत्व

  • विघ्नहर्ता की उपासना – गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है। किसी भी पूजा या शुभ कार्य की शुरुआत उनसे करने से सभी बाधाएँ दूर होती हैं।
  • शुभारंभ का प्रतीक – हिन्दू परंपरा में किसी भी यज्ञ, व्रत, विवाह, गृह प्रवेश या त्योहार की शुरुआत गणेश आरती से होती है।
  • आध्यात्मिक शांति – आरती गाने या सुनने से मन एकाग्र होता है और मानसिक शांति मिलती है।
  • पारिवारिक समृद्धि – गणेश आरती करने से घर में सुख-शांति, समृद्धि और सौहार्द का वातावरण बना रहता है।

गणेश आरती करने के लाभ

  1. बाधाओं का निवारण – आरती करने से जीवन की कठिनाइयाँ और रुकावटें दूर होती हैं।
  2. बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति – गणपति जी को बुद्धि के देवता माना गया है। उनकी आरती करने से निर्णय लेने की शक्ति बढ़ती है।
  3. आर्थिक उन्नति – भक्तों को धन-धान्य और व्यापार में सफलता मिलती है।
  4. स्वास्थ्य लाभ – आरती गाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक तनाव कम होता है।
  5. भक्ति और विश्वास में वृद्धि – आरती करने से आत्मविश्वास और ईश्वर पर आस्था मजबूत होती है।

गणेश जी की आरती करने की विधि (Step by Step Guide)

गणेश जी की आरती करने की सही विधि

गणेश जी की आरती करने से पहले शुद्धता और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। नीचे चरणबद्ध विधि दी गई है:

  1. स्थान की शुद्धि
    • पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
    • वहाँ पर गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  2. पूजा सामग्री तैयार करें
    • दीपक (घी या तेल का)
    • धूप या अगरबत्ती
    • फूल (लाल या पीले)
    • मोदक या लड्डू (गणेश जी का प्रिय भोग)
    • अक्षत (चावल), रोली और सिंदूर
  3. स्नान और शुद्ध वस्त्र
    • स्नान करके साफ और हल्के रंग के वस्त्र पहनें।
    • पूजा में बैठते समय मन को शांत रखें।
  4. प्रारंभिक पूजा
    • सबसे पहले दीपक और धूप जलाएँ।
    • गणेश जी पर अक्षत, फूल और सिंदूर अर्पित करें।
  5. आरती का गायन
    • घंटी बजाते हुए पूरी गणेश आरती गाएँ।
    • सभी परिवारजन मिलकर आरती में सम्मिलित हों।
  6. भोग और प्रसाद अर्पण
    • गणेश जी को मोदक, लड्डू या फल अर्पित करें।
    • आरती के बाद प्रसाद सभी को बाँटें।
  7. प्रणाम और आशीर्वाद
    • आरती पूरी होने पर हाथ जोड़कर गणेश जी को प्रणाम करें।
    • अपने परिवार और कार्यों की सफलता के लिए आशीर्वाद माँगें।

गणेश जी की आरती का महत्व

भगवान गणपति को विघ्नहर्ता कहा गया है। जब भी कोई शुभ कार्य, उत्सव, विवाह, गृहप्रवेश या किसी पूजा का आरंभ होता है तो सबसे पहले गणेश जी की पूजा होती है। आरती गाने से वातावरण शुद्ध और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। यह केवल परंपरा ही नहीं बल्कि भक्त और भगवान के बीच आत्मिक जुड़ाव का माध्यम भी है।

आरती के समय दीपक की ज्योति, घंटी की ध्वनि और शंखनाद मिलकर एक दिव्य शक्ति का निर्माण करते हैं। माना जाता है कि श्री गणेश जी आरती से अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्त के जीवन से सभी बाधाओं को दूर करते हैं।


धार्मिक मान्यता और कथा

पुराणों के अनुसार, भगवान गणेश शिवजी और माता पार्वती के पुत्र हैं। वे ज्ञान, बुद्धि और समृद्धि के देवता माने जाते हैं। गणेश जी की आरती का विशेष महत्व गणेश चतुर्थी के दिनों में होता है।

एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, नारद मुनि ने देवताओं के बीच यह प्रतियोगिता कराई कि कौन सबसे पहले पूरी पृथ्वी का चक्कर लगाकर वापस आएगा। सभी देवता अपने-अपने वाहन लेकर निकल पड़े। लेकिन गणेश जी ने अपने माता-पिता, भगवान शिव और माता पार्वती के चारों ओर तीन परिक्रमा कर ली और कहा कि उनके लिए पूरा ब्रह्मांड ही माता-पिता हैं। उनकी बुद्धिमानी से प्रसन्न होकर उन्हें “सर्वप्रथम पूज्य” होने का आशीर्वाद मिला। इसी कारण हर पूजा में सबसे पहले गणेश जी की आरती और पूजा होती है।


आरती करने की विधि

गणेश जी की आरती करने का एक सरल और पारंपरिक तरीका है:

  1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. घर के मंदिर या पूजा स्थान को साफ करें।
  3. गणेश जी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक और धूप जलाएँ।
  4. ताजे फूल, दूर्वा (तीन पत्तों वाली घास), लड्डू या मोदक अर्पित करें।
  5. हाथ में आरती की थाली लेकर परिवार के साथ मिलकर आरती गाएँ।
  6. शंख, घंटी और तालियों की ध्वनि से वातावरण को पवित्र करें।
  7. आरती के बाद प्रसाद बाँटें और सब मिलकर आनंदपूर्वक ग्रहण करें।

गणेश जी की आरती करने से होने वाले लाभ

गणेश जी की आरती करने से भक्त को कई प्रकार के शुभ फल प्राप्त होते हैं, जैसे:

  • जीवन में बाधाएँ और कठिनाइयाँ दूर होती हैं।
  • कार्यों में सफलता मिलती है।
  • घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
  • विद्यार्थी और ज्ञानार्जन करने वाले लोगों को विशेष लाभ मिलता है।
  • व्यवसाय में उन्नति और धन की वृद्धि होती है।
  • मानसिक शांति और आत्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है।

भक्तों के अनुभव

कई भक्त बताते हैं कि नियमित रूप से गणेश जी की आरती करने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और जीवन की कठिनाइयाँ धीरे-धीरे समाप्त हुई हैं। विशेषकर, हर मंगलवार और गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी की आरती करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।


सामान्य प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: क्या गणेश जी की आरती केवल गणेश चतुर्थी पर ही करनी चाहिए?
उत्तर: नहीं, इसे आप प्रतिदिन सुबह-शाम कर सकते हैं।

प्रश्न 2: आरती के समय कौन-सा प्रसाद अर्पित करना शुभ होता है?
उत्तर: गणेश जी को मोदक और दूर्वा अति प्रिय हैं।

प्रश्न 3: क्या आरती करने के लिए पूरा परिवार होना जरूरी है?
उत्तर: नहीं, यदि अकेले भी श्रद्धा से आरती की जाए तो उसका पूर्ण फल मिलता है।


निष्कर्ष

गणेश जी की आरती केवल पूजा का हिस्सा नहीं बल्कि हमारे जीवन को सकारात्मकता से भरने का एक मार्ग है। यह आरती हमें हर कार्य में सफलता, समृद्धि और आत्मिक शांति प्रदान करती है।

👉 इसलिए, जब भी आप किसी नए कार्य की शुरुआत करें, विवाह, गृहप्रवेश या त्यौहार मनाएँ, तो श्री गणेश जी की आरती अवश्य करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

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